कुम्भ मेला 2019 जानिए क्या है खास

मकर संक्रांति से होगी अर्ध कुंभ की शुरुआत, होगा पहला शाही स्नान

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कर संक्रांति से शुरू हो जाएगा कुंभ पर्व स्नान, जानिए महत्वपूर्ण तारीखें.

सनातन धर्म में यूं तो बहुत से पर्वों को शुभता और उत्साह के साथ मनाने की परंपरा रही है किंतु जब भी बात होती है कुंभ की तो उत्साह दोगुना और अध्यात्म चरम पर होता है. इस साल संगम के पावन तट पर लगने वाले अर्ध कुंभ मेले के आयोजन की तैयारी पूरी हो चुकी हैं. इंतजार है मकर संक्रांति का क्योंकि इसी दिन अर्ध कुंभ का पहला स्नान होगा. आस्था की डुबकी के लिए करोड़ों की संख्या में भक्त कुंभ मेले में पहुंच रहे हैं और लगभग दो महीने तक अध्यात्म और आस्था की महामेला गंगा के पावन तट यूं रहेगा.

साल 2013 में महाकुंभ का आयोजन हुआ था, जिसके ठीक 6 साल के बाद हरिद्वार और प्रयाग के गंगा तटों पर अर्ध कुंभ का आयोजन अब होने जा रहा है. हरिद्वार और प्रयाग में हर 6 साल में अर्धकुंभ का आयोजन होता है.

हैल्लो दोस्तों स्वागत है आप सभी हमारे “WEBSITE BIHARIBOYSCOMEDY.COM” में आज हम जिस topic पर बात करने वाले है वो है आस्था का महापर्व महाकुम्भ 2019 कि है वो सारी जानकारिया आप सब को इस पोस्ट के माध्यम से हम आप सभी को बताने वाले है |दोस्तों हमरे इस bihari boys comedy कि blogging section में आप सभी को वो हर news कि जानकारी मिल जाएगी | जो कि आप सभी को बहुत ही लाभदायक और फायदेमंद साबित हो सकता है | दोस्तों हमारे इस blogging section में हर तरह कि news मिल जाएगा | तो महाकुम्भ कि और भी पूरी जानकारी के लिए इस पोस्ट को पूरा पढ़े |

क्यों होता है कुंभ का आयोजन ?

कुंभ को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं जिनमें प्रमुख कथा समुद्र मंथन के दौरान निकलने वाले अमृत कलश से जुड़ी है. महर्षि दुर्वासा के शाप के कारण जब देवता कमजोर हो गए तो दैत्यों ने देवताओं पर आक्रमण कर उन्हें परास्त कर दिया. तब भगवान विष्णु ने उन्हें दैत्यों के साथ मिलकर क्षीरसागर का मंथन करके अमृत निकालने की सलाह दी. क्षीरसागर मंथन के बाद अमृत कुंभ के निकलते ही इंद्र के पुत्र ‘जयंत’ अमृत-कलश को लेकर आकाश में उड़ गए. उसके बाद दैत्यगुरु शुक्राचार्य के आदेश पर दैत्यों ने अमृत को वापस लेने के लिए जयंत का पीछा कर उसे पकड़ लिया. अमृत कलश पर अधिकार जमाने के लिए देव-दानवों में बारह दिन तक लगातार युद्ध होता रहा. इस युद्ध के दौरान पृथ्वी के चार स्थानों प्रयाग, हरिद्वार, उज्जैन, नासिक में कलश से अमृत बूंदें गिरी थीं. शांति के लिए भगवान ने मोहिनी रूप धारण कर सबको अमृत बांटकर देव-दानव युद्ध का अंत किया. तब से जिस-जिस स्थान पर अमृत की बूंदें गिरीं थीं, वहां कुंभ मेले का आयोजन होता है |

कुंभ के महत्व को ब्रह्म पुराण एवं स्कंध पुराण के 2 श्लोकों के माध्यम समझा जा सकता है |

‘विन्ध्यस्य दक्षिणे गंगा गौतमी सा निगद्यते उत्त्रे सापि विन्ध्यस्य भगीरत्यभिधीयते |

‘एव मुक्त्वाद गता गंगा कलया वन संस्थिता, गंगेश्वेरं तु यः पश्येत स्नात्वा शिप्राम्भासि प्रिये’|

अब आपको बताते हैं 2019 के अर्ध कुंभ मेले के शाही स्नान की तारीखें-|

कुंभ मेले के शाही स्नान की तारीखें (Kumbh Snan Dates and Kumbh Shahi Snan)

14-15 जनवरी 2019 – मकर संक्रांति, पहला शाही स्नान

21 जनवरी 2019 – पौष पूर्णिमा

31 जनवरी 2019 – पौष एकादशी स्नान

04 फरवरी 2019 – मौनी अमावस्या, मुख्य शाही स्नान, दूसरा शाही स्नान

10 फरवरी 2019 – बसंत पंचमी, तीसरा शाही स्नान

16 फरवरी 2019 – माघी एकादशी

19 फरवरी 2019 – माघी पूर्णिमा

04 मार्च 2019 – महा शिवरात्रि

वेद, पुराण, धर्म, शास्त्रों में कुंभ के महत्व को समझाया गया है और युगों युगों से पतित पावनी गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर श्रद्धालु मोक्ष की प्राप्ति कर रहे हैं तो अर्ध कुंभ पर यदि मौका मिले तो आप भी आस्था की गंगा में डुबकी लगा लीजिए, आपको पापों से मुक्ति मिल जाएगी |

जानें, क्या है प्रयागराज और कुंभ की महिमा

प्रयागराज में दुनिया का सबसे बड़ा मेला कुंभ मेला लग रहा है. मकर संक्रांति के साथ कुंभ मेले की शुरुआत हो जाएगी. हिंदू धर्म के अनुसार मान्यता है कि कुंभ में किसी भी नदी में स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है. यही वजह है कि कुंभ में देश-विदेश से लोग पवित्र नदी में डुबकी लगाने पहुंचते हैं. इस बार कुंभ में 12 करोड़ लोगों के आने का अनुमान है |

तीर्थ राज प्रयाग की देव भूमि पर गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम होता है इसलिए इस स्थान का महत्व और महिमा सर्वोपरि है. तीर्थराज प्रयाग का उल्लेख धर्मशास्त्रों में भी मिलता है. कहते हैं कि यही वो स्थान है, जहां से प्रभु राम को केवट ने गंगा पार कराया था |

12 वर्षों में लगता है कुंभ

कुंभ मेले का आयोजन प्राचीन काल से हो रहा है. कुंभ मेले का आयोजन चार जगहों पर होता है. हरिद्वार, प्रयाग, नासिक और उज्जैन में कुंभ का मेला होता है. इन चार स्थानों पर प्रत्येक 3 वर्ष के अंतराल में कुंभ का आयोजन होता है इसीलिए किसी एक स्थान पर प्रत्येक 12 वर्ष बाद ही कुंभ का आयोजन होता है |

शास्त्रों में भी है कुंभ का जिक्र

कुंभ मेले का वर्णन शास्त्रों में मिलता है. कहते हैं इस पर्व का संबंध समुद्र मंथन से रहा है. इससे जुड़ी एक पौराणिक कथा भी है. इस पर्व का संबंध समुद्र मंथन के दौरान अंत में निकले अमृत कलश से जुड़ा है. देवता-असुर जब अमृत कलश को एक दूसरे से छीन रह थे, तब उसकी कुछ बूंदें धरती की तीन नदियों में गिरी थीं. जिन तीन नदियों में अमृत बूंदे गिरी थी वे हैं गंगा, गोदावरी और क्षिप्रा. जहां ये बूंदें गिरी थीं, उस स्थान पर कुंभ का आयोजन होता है. प्रयाग में इस बार अर्ध कुंभ का आयोजन हो रहा है. अब सवाल ये भी है कि कुंभ और अर्ध कुंभ में क्या अंतर है |

अर्धकुंभ क्या है?

हरिद्वार और प्रयाग में दो कुंभ पर्वों के बीच 6 वर्ष के अंतराल में अर्धकुंभ का आयोजन होता है. पौराणिक ग्रंथों में भी कुंभ एवं अर्ध कुंभ के आयोजन को लेकर ज्योतिषीय विश्लेषण हैं. कुंभ पर्व हर 3 साल के अंतराल पर हरिद्वार से शुरू होता है. हरिद्वार के बाद कुंभ पर्व प्रयाग नासिक और उज्जैन में मनाया जाता है. प्रयाग और हरिद्वार में मनाए जाने वाले कुंभ पर्व में और प्रयाग और नासिक में मनाए जाने वाले कुंभ पर्व के बीच में 3 सालों का अंतर होता है. यहां माघ मेला संगम पर आयोजित एक वार्षिक समारोह है |

कुंभ पर्व हिंदू धर्म का एक बहुत ही श्रद्धेय पर्व है जिसमें करोड़ों श्रद्धालु कुंभ पर्व वाले स्थानों हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन और नासिक में स्नान करते हैं. शास्त्रों के मुताबिक, चार विशेष स्थानों पर ही कुंभ मेला लग सकता है. नासिक में गोदावरी नदी के तट पर, उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर, हरिद्वार और प्रयागराज में गंगा नदी के तट पर ही कुंभ का आयोजन हो सकता है. इनमें से प्रत्येक स्थान पर हर 12वें साल में, हरिद्वार और प्रयाग में दो कुंभ पर्वों के बीच छह साल के अंतराल में अर्धकुंभ भी होता है|

कुंभ मेले की महिमा

कुंभ पर्व का सीधा सम्बन्ध तारों से है. अमृत कलश को स्वर्गलोक तक ले जाने में जयंत को 12 दिन लगे. देवों का एक दिन मनुष्यों के 1 वर्ष के बराबर है. इसीलिए तारों के क्रम के अनुसार हर 12वें वर्ष कुंभ पर्व विभिन्न तीर्थ स्थानों पर आयोजित होता है. युद्ध के दौरान सूर्य, चंद्र और शनि आदि देवताओं ने कलश की रक्षा की थी. उस समय की वर्तमान राशियों पर रक्षा करने वाले चंद्र-सूर्यादिक ग्रह जब आते हैं. तब कुंभ का योग होता है, चारों पवित्र स्थलों पर प्रत्येक 3 वर्ष के अंतराल पर क्रमानुसार कुंभ मेले का आयोजन होता है |

अमृत की बूंदे छलकने के समय जिन राशियों में सूर्य, चंद्रमा, बृहस्पति की स्थिति के विशिष्ट योग के अवसर रहते हैं. वहां कुंभ पर्व का इन राशियों में गृहों के संयोग पर आयोजन होता है. इस अमृत कलश की रक्षा में सूर्य, गुरु और चन्द्रमा के विशेष प्रयत्न रहे थे. इसी कारण इन्हीं गृहों की उन विशिष्ट स्थितियों में कुंभ पर्व मनाने की परम्परा है |

कुंभ में स्नान के लाभ-

कुंभ में स्नान करने से इंसान के पापों का प्रायश्चित हो जाता है

कुंभ का मेला मकर संक्रांति के दिन शुरु होता है |

इस दिन जो योग बनता है उसे कुंभ स्नान-योग कहते हैं |

मान्यता है कि किसी भी कुंभ मेले में पवित्र नदी में स्नान से सभी पाप धुल जाते हैं |

कुंभ स्नान से मनुष्य को मोक्ष और सदंगति की प्राप्ति होती है |

मकर संक्रांति के साथ ही संगम तट पर अर्ध कुंभ की शुरुआत हो जाएगी. देश के साथ साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पावन गंगा में आस्था की डुबकी लगाने पहुंचेंगे |

जानें, क्या होता है कल्पवास और कितना है मुश्किल?

प्रयागराज में गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम स्थल पर कल्पवास की परंपरा आदिकाल से चली आ रही है. तीर्थराज प्रयाग में संगम के निकट हिन्दू माघ महीने में कल्पवास करते हैं. मान्यता है कि प्रयाग में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ शुरू होने वाले एक मास के कल्पवास से एक कल्प अर्थात ब्रह्मा के एक दिन का पुण्य मिलता है. पौष पूर्णिमा से कल्पवास आरंभ होता है और माघी पूर्णिमा के साथ संपन्न होता है |

कल्पवास में लोग संगम के तट पर डेरा जमाते हैं. पौष पूर्णिमा के साथ आरंभ करने वाले श्रद्धालु एक महीने वहीं बस जाते हैं और भजन-ध्यान आदि करते हैं. कुछ लोग मकर संक्रांति से भी कल्पवास आरंभ करते हैं. कल्पवास मनुष्य के लिए आध्यात्मिक विकास का जरिया है |

कुम्भ मेले में संगम तट पर कल्पवास का खास महत्व है. कल्पवास का जिक्र वेदों और पुराणों में भी मिलता है. कल्पवास एक बहुत ही मुश्किल साधना है क्योंकि इसमें तमाम तरह के नियंत्रण और संयम का अभ्यस्त होने की जरूरत होती है. पद्म पुराण में महर्षि दत्तात्रेय ने कल्पवास के नियमों के बारे में विस्तार से बताया है. उनके अनुसार कल्पवासी को इक्कीस नियमों का पालन करना चाहिए. ये नियम हैं – सत्यवचन, अहिंसा, इन्द्रियों का शमन, सभी प्राणियों पर दयाभाव, ब्रह्मचर्य का पालन, व्यसनों का त्याग, सूर्योदय से पूर्व शैय्या-त्याग, नित्य तीन बार सुरसरि-स्न्नान, त्रिकालसंध्या, पितरों का पिण्डदान, दान, जप, सत्संग, क्षेत्र संन्यास अर्थात संकल्पित क्षेत्र के बाहर न जाना, परनिन्दा त्याग, साधु सन्यासियों की सेवा, जप एवं संकीर्तन, एक समय भोजन, भूमि शयन, अग्नि सेवन न कराना. कल्पवास में सबसे ज्यादा महत्व ब्रह्मचर्य, व्रत एवं उपवास, देव पूजन, सत्संग, दान का है

कल्पवास के दौरान साफ सुथरे श्वेत वस्त्रों को धारण करना चाहिए. पीले एव सफेद रंग का वस्त्र श्रेष्ठकर होता है. इस प्रकार से आचरण कर मनुष्य अपने अंतःकरण एवं शरीर दोनों का कायाकल्प कर सकता है |

एक माह तक चलने वाले कल्पवास के दौरान कल्पवासी को जमीन पर सोना पड़ता है. इस दौरान श्रद्धालु फलाहार, एक समय का आहार या निराहार रहते हैं. कल्पवास करने वाले व्यक्ति को नियमपूर्वक तीन समय गंगा स्नान और यथासंभव भजन-कीर्तन, प्रभु चर्चा और प्रभु लीला का दर्शन करना चाहिए. कल्पवास की शुरुआत करने के बाद इसे 12 वर्षों तक जारी रखने की परंपरा रही है. हालांकि इसे अधिक समय तक भी जारी रखा जा सकता है |

कल्पवास की शुरुआत के पहले दिन तुलसी और शालिग्राम की स्थापना और पूजन होती है. कल्पवासी अपने टेंट के बाहर जौ का बीज रोपित करता है. कल्पवास की समाप्ति पर इस पौधे को कल्पवासी अपने साथ ले जाता है. जबकि तुलसी को गंगा में प्रवाहित कर दिया जाता है |

कुंभ मेले को खास बनाएंगी ये 4 सुविधाएं, श्रद्धालुओं का हर काम होगा आसान

प्रयागराज में 15 जनवरी से शुरू होने वाले कुंभ मेले में कई ऐसी सुविधाएं हैं जिससे श्रद्धालुओं की हर परेशानी दूर होगी

यूपी के प्रयागराज में 15 जनवरी से कुंभ 2019 का आगाज हो रहा है. इस बार कुंभ नगरी को सुविधा संपन्न बनाने के लिए राज्‍य और केंद्र सरकार की ओर से कई खास इंतजाम किए गए हैं. आज हम इस रिपोर्ट में ऐसी ही 4 सुविधाओं के बारे में बताने जा रहे हैं |

पानी में मिलेगी डाकसेवा

करीब 50 दिन तक चलने वाले कुंभ मेले में पहली बार नदी में डाकसेवा उपलब्‍ध कराई जाएगी. यानि श्रद्धालुओं को अपनी खैरियत की खबर परिजन को देने या कुंभ की कोई निशानी भेजने के लिए कहीं दूर जाने की जरूरत नहीं होगी. वह नदी में घूमने वाले इस डाकघर की सेवाएं ले सकेंगे. इस डाकघर में लोगों को मनी ऑर्डर, स्पीड पोस्ट जैसी सभी सेवाएं मिल सकेंगी. इसके अलावा डाक विभाग ने मेला स्थित डाक घर में माई स्टैंप मशीन लगाने की भी योजना बनाई है. यहां लोग अपनी फोटो वाला डाक टिकट निकाल सकेंगे. यही नहीं, मेले के दौरान हर 4-5 दिन में खाता खोलने का शिविर लगाया जाएगा. वहीं कुंभ मेला क्षेत्र में 10 डाकघर खोलने की योजना है |

बिना इंटरनेट के काम करेगा पीएनबी का कार्ड

पब्‍लिक सेक्‍टर के पंजाब नेशनल बैंक ने कुंभ मेले के दौरान लोगों को आसान लेनदेन की सुविधा देने के लिए विशेष कार्ड पेश किया है. बैंक के मुताबिक यह आयोजन लेन-देन को आसान बनाने के लिये डिजिटलीकरण का उपयोग करने का एक अच्छा अवसर है. दुकानों पर सुविधाजनक लेनदेन के लिए बैंक ने एक स्वदेशी उत्पाद पीएनबी रूपे कार्ड बनाया है जो बिना इंटरनेट के भी काम करेगा |

पैसे के लिए भटकने की जरूरत नहीं

कुंभ आने वाले स्नानार्थियों और सैलानियों को पैसे के लिए भटकने की जरूरत नहीं होगी. दरअसल, कुंभ क्षेत्र के हर सेक्टर में अस्थायी बैंकों का निर्माण हुआ है, जबकि जगह-जगह पर एटीएम भी लगाए जा रहे हैं. इन अस्थायी एटीएम की खासियत यह होगी कि यहां पर कैश की किल्लत किसी भी वक्त नहीं होगी. यहां स्थापित होने वाले सभी एटीएम 24 घंटे खुले रहेंगे और एटीएम हमेशा कैश से लैस रहेंगे |

एयर इंडिया की विमान सेवा

एयर इंडिया कुंभ मेला के लिए विभिन्न शहरों और प्रयागराज के बीच विशेष उड़ानों का संचालन शुरू करेगी. विशेष उड़ानें 13 जनवरी से 30 मार्च के बीच संचालित होंगी. इनके जरिये इलाहाबाद को दिल्ली, अहमदाबाद और कोलकाता के साथ जोड़ा जाएगा |

कुंभ मेले में अदृश्य शक्तियों के प्रभाव से आते हैं 15 करोड़ लोग

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वे करीब 11 बजे से ही पूरे कुम्भ क्षेत्र में घूमकर सुविधाओं को देख रहे हैं. उनका एक ही भाव है कि यहां आने वाले किसी भी श्रद्धालु को कोई कष्ट न हो. यह हम सब की सामूहिक जिम्मेदारी बनती है कि इस मेले में आने वाला हर व्यक्ति अच्छा अनुभव लेकर जाए |

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि कुम्भ मेले के आयोजन में दृश्य और अदृश्य दोनों प्रकार की शक्तियां उपस्थित रहती हैं. हम भले ही अदृश्य शक्तियों को न देख पाते हों, लेकिन इन्हीं के प्रभाव से 12-15 करोड़ लोग इस मेले में खिंचे चले आते हैं. कुम्भ मेला क्षेत्र में अखाड़ों के शिविरों में व्यवस्थाओं और मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए मुहैया कराई जा रही सुविधाओं का जायजा लेने के बाद एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने ये विचार व्यक्त किए |

मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं को बताया, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी गंगा पूजन के साथ इस कुम्भ का शुभारंभ कर चुके हैं. 17 जनवरी के आसपास राष्ट्रपति जी का भी आगमन प्रस्तावित है और फरवरी के महीने में उप राष्ट्रपति का भी आगमन कुम्भ के दौरान होगा.” उन्होंने कहा, “वाराणसी में प्रवासी भारतीय दिवस होने जा रहा है, जनवरी में 5,000 प्रवासी भारतीय कुम्भ मेले में भी आएंगे.” योगी आदित्यनाथ ने कहा, “हम करीब 11 बजे से ही पूरे कुम्भ क्षेत्र में घूमकर सुविधाओं को देख रहे हैं. हमारा एक ही भाव है कि यहां आने वाले किसी भी श्रद्धालु को कोई कष्ट न हो. यह हम सब की सामूहिक जिम्मेदारी बनती है कि इस मेले में आने वाला हर व्यक्ति अच्छा अनुभव लेकर जाए.”

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुम्भ मेले के लिहाज से सरकार ने प्रयागराज के लिए बहुत कुछ नया करने का प्रयास किया है. उन्होंने कहा, “डेढ़ वर्ष से कम अवधि में 10 से अधिक फ्लाईओवर, छह अंडरपास, 264 से अधिक सड़कों का निर्माण एवं चौड़ीकरण, 64 से अधिक चौराहों का सुंदरीकरण होना, अक्षयवट और सरस्वती कूप के दर्शन की सुविधा उपलब्ध कराना, कुम्भ के क्षेत्रफल का विस्तार होना.. ये बहुत सी ऐसी चीजें हैं जो पहली बार लोगों को देखने को मिलेगा.’’ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ प्रदेश के नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना, स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह, नागरिक उड्डयन मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी, कुम्भ मेला अधिकारी विजय किरण आनंद और प्रशासन के अन्य अधिकारी मौजूद थे |

कुंभ के दौरान गाजियाबाद के स्लॉटर हाउस रहेंगे बंद

वहीं कुंभ मेला के दौरान गंगा को साफ रखने और उसमें गंदे पानी का प्रवाह रोकने के लिए प्रशासन ने उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद की 24 बड़ी औद्योगिक इकाइयों को बंद करने का आदेश दिया है. गाजियाबाद की जिलाधिकारी रितु माहेश्वरी ने कहा कि इन औद्योगिक इकाइयों में बूचड़खाना, पेपर मिल्स, कपड़ा उद्योग और डिस्टलरी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि यह प्रतिबंध रविवार से लागू होगा और चार मार्च को कुंभ मेले के समापन तक प्रभावी रहेगा. जिलाधिकारी ने बताया कि इन इकाइयों के अपशिष्ट कादराबाद नाले में गिरते हैं जो गंगा में गिरता है |

BBC

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