सूर्य और परमाल-Hindi Story

सूर्य और परमाल-Hindi Story

                            सूर्य और परमाल

सूर्य और परमाल:-बगदाद के खलीफा वालिद कि सेना ने भारत में सिंध प्रदेश के देवल राज्य पर आक्रमण किआ | इस सेना का सेनापती मोहमद बिन कासिम था |देवल के राजा दाहर और उसके पुत्र जयसाहने अपनी सेना के साथ सत्रु का सामना किआ | देवल राज्य कि सेना कि वीरो ने बड़ी बहादुरी से युद्ध किआ ; लेकिन आक्रमण करने वाली शत्रु सेना बहुत बड़ी थी | देवल राज्य कि पूरी सेना और रजा तथा राजकुमार भी युद्ध में मरे गए| वहा कि महारानी ने अपने पति कि मृत्यु का समाचार सुना तो वे स्त्रियो कि सेना बना कर राजमहल से निकली और शत्रुवो पर टूट पड़ी | महारानी और उनके साथ कि वीर स्त्रियाँ युद्ध करते हुए मरी गई | मोहमद बिन कासिम ने राजमहल लुवा लिया | लुट कि दुसरे सामान के साथ उसने रजा दहर का कटा सर ,रजा का छत्र , और उनकी दोनों सूर्य और परमाल नाम कि पुत्रियों को बंदी बना कर बगदाद भेज दिया | वह स्वं पुरे भारत वस को जितना चाहता था ; इसलिए सिंध में ही रुक गया |

सूर्य और परमाल:- बगदाद के खलीफा के पास जब रजा दहर कि पुत्रिया पहुंची तो वह उनकी अद्भुत सुन्दरता देख कर अचम्भे में आ गया, उसे लगा कि स्वर्ग से अप्सराये आ गई है | उसने सूर्य कुमारी से विवाह का प्रस्ताव किया | बेचारी राजकुमारिया विदेश में शत्रु के राज्यमहल में अकेली क्या कर सकती थी | लेकिन उन्होंने अपने पिता को मरने वाले से बदला लेने का निश्चय कर लिया था जब खलीफा ने सूर्यकुमारी से विवाह का परस्तव किआ तो वाह रोने लगी | उसे रोते देख कर खलीफा उसे चुप करने उसकी और चला | सूर्यकुमारी पीछे हट गई और बोली – खलीफा! आप हमे छूना मत | आपके बीच सेना पति बिन कासिम ने हमे अपवित्र कर दिया है |

सूर्य और परमाल:-खलीफा ने यह सुना तो वाह क्रोध से कपने लगा | उसने उस समय अपने दूत भारत भेजे और यह आज्ञा दी कि मोहमद बिन कासिम को जीते जी सुखी खल में सी दिया जाये | और उसकी लाश मेरे सामने हाजिर किआ जाये | खलीफा के दूत भारत आये | मोहमद बिन कासिम ने बहुत प्रयत्न किया कि वाह जीवित खलीफा के पास पहुंचे और अपने को निर्दोष साबित करे, किन्तु उसकी बात किसी ने नहीं मानी | वाह सुखी खल में जीते जी सी दिया गया |

             सुखी खल के बोर में साइन पर मोहमद बिन कासिम तो मर गया | उसकी लाश उस बोर में बगदाद पहुचाई गई क्रोध में आकर खलीफा ने उसपर कई लाते लगाई | इसके बाद खलीफा अपने महल के छत पर गया | वहा उसने सूर्य और परमाल को बुलाकर बताया कि मुहमद बिन कासिम कि लाश चमड़े के बोर में सीकर निचे दरबार में पड़ी है |

          सूर्य कुमारी ने कहा – ‘ठीक है’ अपने पिता को मरने और अपने देश को लुटने वाले से बदला ले लिया |

सूर्य और परमाल:-जब खलीफा को मालूम हुआ कि उसके सेना पति का कोई दोष नहीं था , तब उसने अपना सर पिट लिया | सूर्यकुमारी ने अपनी चोटी बहन को सब बाते पहले ही सब बातें समझा दी थी | दुःख और क्रोध से पागल खलीफा से उनसे कहा – ‘हम हिन्द कुमारिय है समझे! किस्मे सहस है जो जीते जी हमारे सरीर को हाथ लगा देगा |’ इतना कहकर इनदोनो वीर बालिकाओ ने महल कि छत के बिलकुल किनारे कड़ी होकर इक दुसरे कि छाती में विस से बुझी कटार जोर से भोक दी और उसके प्राण हिन् देह उची चाट से निचे लुढ़क गये | खलीफा भारत कि लड्कियों कि यह आश्चर्य जनक वीरता देख कर ऐसा घबराया कि वही सर पकड़ कर बैठ गया | 

BBC

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