जादुई घंटी (Jaadui Ghanti) Hindi Story

जादुई घंटी (Jaadui Ghanti)

जादुई घंटी (Jaadui Ghanti):-

 एक नदी के तट पर बहुत सुन्दर गाव था , गाव के लोग मेहनत मजदुर करके जीवन वय्तित करते थे ,उस गाव में रामू नाम का गरीब चरवाहा था ,वो आपने मधुर आवाज के लिए प्रसिद्ध था ,रामू गाव के सभी भेड़ ,बकरियों को गाना सुनाते सुनाते पास के जंगल में ले जाता था ,जंगल में स्तिथ एक पर्वत था , उस पर्वत कि चोटी पर एक विशाल पेड़ था , रामू उस पेड़ कि छाव में गाना गाता और वो सारी भेड़ ,बकरियों पर नजर भी रखता |


शाम होते ही सभी भेड़ ,बकरियों को लेकर के वापस आ जाता और सभी भेड़ बकरियों को गाव वालो को शौप देता ,दिन भर कड़ी धुप में भेड़ बकरियों को चराने के लिए उसे एक सिक्का मिलता ,ये सिक्का रामू घर ले जाता |
रामू – माँ बहुत भूख लगी है चिनू (उसका छोटा भाई) चलो खाना खाते है |

चिनू –क्या माँ ,रोज वही रोटी चटनी |
माँ – चिनू ऐसे नहीं बोलते , रामू बहुत मेहनत कर के पैसे कमाता है , जिससे हम कम से कम भर पेट खाना खा पाते है |
रामू – ये लो माँ आज कि कमाई , चिनू के लिए कुछ अच्छा बना देना |


:- रामू हर दिन भेड़ ,बकरियों को चराने के लिए पर्वत ले जाता , और मिले हुए पैसे से आपना घर चलाता , एक दिन रामू अपने भेड़ ,बकरियों को लेकर पर्वत आया तो उसने देखा एक लकडहारा उस पर्वत पर स्तिथ विशाल पेड़ को काट रहा था , ये देख रामू चिंतित हो गया , रामू को उस पेड़ से लगाव हो गया था , उसने सोचा उस पेड़ को बचाना चाहिए |
रामू – सुनो भाई , ओं लकडहारे , क्या तुम्हे इस पेड़ के क्षाप के बारे में नहीं पता , के साल पहले इस पेड़ को एक रिषिमुनी ने इसे क्षाप दिया था , इस पेड़ पर एक बूढी चुड़ैल रहती है , जो भी व्यक्ति इस पेड़ को छूता है वो उसे मार डालती है इस से पहले वो आये और वो तुम्हे मार दे तुम यहाँ से भाग जाओ |


:- लकडहारे को गिरता देख रामू हसने लगा |हहहहाहा ,,,,, | तभी उस पेड़ से आत्मा प्रकट हुई |
आत्मा – बहुत बहुत धन्यवाद रामू ,तुमने मेरी जान बचाई , तुम बहुत अच्छे इन्सान हो मै तुम्हे एक उपहार देना चाहता हु |
रामू – एक मामूली घंटी ,पर इससे क्या होगा |
आत्मा – ये कोई मामूली घंटी नहीं , जादुई घंटी है , इस घंटी कि मदद से तुम जो खाना चाहो वो तुम्हे मिल सकता है |
रामू – शुक्रिया , मतलब मै और मेरा परिवार कभी भूखा नहीं सोएगा |
आत्मा – लेकिन ,रामू तुम ये याद रखना इसका इस्तेमाल दिन में केवल एक ही बार हो सकता है |
रामू – शुक्रिया 


:- जादुई घंटी लेकर रामू ख़ुशी ख़ुशी घर आया |
रामू – माँ देखो , देखो मुझे क्या मिला है |
माँ – ये क्या , ये तो एक मामूली सी घंटी है |
चिनू – इस घंटी का क्या करोगे भईया |
रामू – अरे ,चिनू ये कोई मामूली घंटी नहीं है, ये जादुई घंटी है इस घंटी कि मदद से हम जो चाहे वो खाना मंगवा सकते है |
चिनू – सच में भईया , चलो मंगाते है |
रामू – तो बताओ तुम्हे क्या खाना है चिनू |
चिनू – मुझे , रोटी ,चावल ,पनीर ,दाल और जलेबी खाना है |
रामू – घंटी बजता है , सभी खाने कि चीजे वहा प्रकट हो जाता है |
माँ – ये तो सच में जादू है |
रामू – देखा , मैंने कहा था ना |


:- फिर क्या था रामू ख़ुशी ख़ुशी भेड़ ,बकरियों चराने जाता , क्युकी अब उसे खाने कि चिंता नहीं रही , एक दिन रामू को बहुत भूख लगी थी , और वो घर आया घर आकर उसने देखा चिनू ने पहले ही खाना मंगवा लिया है और लगभग सब ख़त्म हो चूका है उसने फिर से घंटी बजाई ,पर इस बार खाना नहीं आई , तब इसे याद आई जादुई घंटी दिन में केवलएक ही बार इस्तेमाल हो सकती है अपनी भूख और खाली बर्तन देख कर उसे गुस्सा आया , उसने ये सोचा उसे ये घंटी अपनी भूख मिटने के लिए मिली थी , उसने फैसला किया जब वो कल पर्वत पर जाएगा तो जादुई घंटी आपने साथ ले जाएगा , रामू अपने साथ जादुई घंटी ले गया , और यहाँ घर पर चिनू और माँ जादुई घंटी ढून्ढ रहे थे उन्होंने सुबह से कुछ नहीं खाया उन्हें बहुत भूख लगी थी , जब घंटी नहीं मिली ,माँ बेटे बैठ कर रामू कि राह देखने लगे , शाम हो गई . और रामू आ गया रामू को देखकर |

चिनू – भईया , मुझे बहुत भूख लगी है , और जादुई घंटी भी नहीं मिल रही है |
रामू – अरे , यहाँ है |
माँ – तुम अपने साथ ले गए थे पर क्यों बेचारा चिनू सुबह से भूख के मरे तड़प रहा है क्या तुम सिर्फ अपना पेट भरना चाहते थे |
रामू – माहि , माँ एसा बात नहीं है |
चिनू – भईया , अपने ऐसा क्यों किया (चिनू रोने लगा) |
रामू – मुझे माफ कर दो माँ , मै थोरा स्वार्थी हो गया था , मै एसा कभी नहीं करूँगा माँ |


:- इससे हमें ये सिख मिलाती है कि हमें कभी भी स्वार्थी नहीं होनी चाहिए और अपने आप से पहले अपने परिवार के बारे में सोचना चाहिए |

BBC

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