मछुवारे और उसकी पत्न्नी/ The fisherman and his wife Hindi story

मछुवारे और उसकी पत्न्नी/ The fisherman and his wife Hindi story

The fisherman and his wife

ये कहानी है मछुवारे और उसकी पत्न्नी की :- मछुवारा और उसकी पत्नी एक बड़े से पहाड़ पर रहते थे एक सागर के किनारे वो रोज पहाड़ पर चढ़ाता और रोज अपने खाने के लिए उस सागर से मछली पकड़ता | वो अपने इस जीवन में खुश था और वो जानता था कि उसकी पत्नी खुश नहीं है | वो हमेशा क्रोधीत रहती थी |

पत्नी –इस गन्दी कुटिया कि ओर देखो ये बदबू मुझे बीमार कर देती है मै इसे रात दिन साफ करती पर ये साफ होती ही नहीं |

:- मछुवार अपनी पत्नी से बहुत प्रेम करता था पर उसकी पत्नी ने कभी भी सिकायत करना बंद नहीं किया | माछुवारा अनपे आच्छे दिनों में जब दो मछलिया पकड़ता तो उसकी पत्नी तिन कि मांग करती थी जब उसके लिए वो आम लता तो वो आंगुर कि मांग करती थी |

:- वो कुछ भी नहीं कर पता उसे खुश करने के लिए |

मछुवारा – ओं प्रिये तुम्हे खुश करने के लिए मै क्या करू |

पत्नी – इस बदबूदार कुटिया से मुझे बाहर निकालो ,तब मै खुश हो जाउंगी |

:- एक दिन मछुवार मछली पकड़ने गया पहाड़ के नजदीक ,पानी सांत और नीला था ,वो वहा उस गहरे समुन्द्र में मछली का काटा डाल कर बैठा था, कुछ समय गुजर गए और वो थक गया |

मछुवारा –ओं आज लग रहा है कि फल खाकर के गुजरा करना पड़ेगा ……..|कुछ समय बाद ,मुझे कुछ महसूस हो रहा है |

:- वो अपने मछली पकड़ने वाली छड़ी को जोर जोर से खीचने लगा |

मछुवारा – ओं ये तो बहुत भारी है ,जरुर कोई बड़ी मछली होगी |

:- जब वो छड़ी बहार निकाला तो एक बहुत ही सुन्दर ,चमकीली ,रंगीन मछली को देख कर के हैरान हो गया |

मछुवारा –अरे वाह चमकीली मछली ,ये इतना भरी क्यों है ,लगता है इसने कुछ ज्यादा खा लिया है |

मछली – नहीं मछुवारे ,मैंने कुछ ज्यादा नहीं खाया है , मै बाकि सभी मछली से अलग हु |

मछुवारा –अरे अभी तुमने मुझसे बात कि ,ये कैसे हो सकता है ,तुम मेरा नाम कैसे जानती हो |

मछली – मई तुम्हारे बारे में सब कुछ जानती हु , मई कोई आम मछली नहीं हु ,मई एक जादुई राजकुमार हु ,मुझे जाने दो ,वैसे भी मुझे खाओगे तो मै स्वादिस्ट नहीं लगूंगा मुझे छोड़ दो |

मछुवारा – ओं कुछ मत कहो ,मै आवश्य बोलने वाली मछली को नहीं मरूँगा, तुम जा सकते हो |

मछली –ओं धन्यवाद

:- वो चमकीली मछली के बारे में बताने के लिए मछुवारा बहुत ही बेताब था ,वो दौड़ा दौड़ा अपनी पत्नी को बताने के लिए घर गया, वो यह भूल गया कि आज पत्नी को देने के लिए कुछ नहीं है |

मछुवारा – प्रिये मुझे कुछ तुम्हे बताना है ,जल्दी इधर आवो |

पत्नी – क्या ,आज कोई मछली नहीं लाये |

मछुवारा – नहीं ,मैंने आज एक बोलने वाली चमकीली मछली पकड़ी थी , उसने बताया कि वो एक राजकुमार है |

पत्नी – क्या ,फिर क्या हुआ |

मछुवारा – फिर , फिर मैंने उसे जाने दिया ,वो अब समुन्द्र में है |

पत्नी – क्या ,तुमने एक जादू कि मछली पकड़ी और तुमने उसे जाने दिया ,तुमने एसा क्यों किया ,हम गरीब और भूखे है ,इस बदबूदार कुटिया में रहते है ,कम से कम एक बेहतर घर मांग सकते थे |

मछुवारा- वो मुझे घर कैसे दे सकता है ,वो एसाम नहीं कर सकता था ,हमें इसी में खुश रहना चाहिए , जो हमारे पास है |

पत्नी – मै खुश रहूंगी ,जब मै एक बंगले में रहूं, क्या तुमने ये नहीं कहा वो एक जादू का राजकुमार था ,तुमने उसकी जान बचाई वो तम्हारे लिए ये कम से कम कर सकता था ,जाओ जा कर के एक बंगला मांगो |

:- मछुवारा थोरा हिचकिचाया और समुन्द्र कि ओर गया ,वो हैरान हुआ ,पानी थोडा हरा और पिला हो गया था |

मछुवारा –जादुई मछली क्या तुम मुझे सुन सकती हो |

:- शीघ्र ही वो जादुई मछली सतह पर आ गई ,जैसे कि वो उस मछुवारे कि इंतजार कर रही हो |

मछुवारा- मेरी पत्नी खुश नहीं है |

मछली – वो चाहती क्या है |

मछुवारा- उसे एक बंगला चाहिए |

मछली – वापस जाओ ,वो उसे मिल चूका है |

:- वो वापस गया ,उसने देखा कि उसकी पत्नी खड़ी है एक बहुत ही खुबशुरत एक लकड़ी के बंगले के दरवाजे पर , वो बंगला बहुत ही खुबसूरत और साफ सुथरी और उसमे फर्नीचर भी लगी थी |

पत्नी – प्रिये देखो ,ये बंगला साफ और सुन्दर है |

मछुवारा- हा ,हमारे पास आग जलाने के लिए अंगीठी भी है ,हम यहाँ हमेसा के लिए रह सकते है |

पत्नी – हमेसा के लिए , हा चलो आब हम खाना खा कर के सो जाते है |

:- पत्नी रात भर नहीं सो पाई ,वो सोचती रही कि खुश होने के लिए और क्या क्या चाहिए ,शुबह डाइनिंग टेबल पर अपने पति का इंतजार करती रही |

पत्नी – Goodmorning पतिदेव ,ये बंगला छोटा है ,मुझे एक महल चाहिए ,और मई एक रानी बनना चाहती हु ,उस चमकीली मचली के पास जाओ और बोलो कि मुझे एक महल चाहिए |

मछुवारा- क्या , तुम्हे रानी क्यों बनना है ,हमारे लिए ये काफी है |

पत्नी – इसका फैसला मुझे करने दो ,उसके पास जाओ और मुझे रानी बनाओ |

मछुवारा- वो समुन्द्र कि ओर गया , आज हवाए तेज थी और पानी बैगनी थी | जादू कि मछली क्या तुम मुझे सुन सकती हो होहोहोहोहोहोहोहो ……….मेरी पत्नी खुश नहीं है |

मछली – उसे क्या चाहिए |

मछुवारा- उसे एक महल चाहिए और वो एक रानी बनना चाहती है |

मछली – वापस जाओ ,वो उसे मिल चूका है |

:- जब वो वापस गया तो वहा पर एक महल था ,जिसके पीतल के दरवाजे था ,नौकर और सिपाही इधर उधर भाग रहे थे ,उसने अपनी पत्नी को सिंघासन पर बैठा देखा ,उसके सिर पर एक ताज था |

मछुवारा- तुम अब एक रानी हो |

पत्नी – हा मै एक रानी हु |

मछुवारा- ये अच्छा है , आब तो तुम खुश हो ना |

पत्नी – नहीं , रानी बनना कोई खास नहीं ,मै एक समरागी बनना चाहती हु |

मछुवारा- क्या , मै जनता हु ,चमकीली मछली समरागी नहीं बना सकती |

पत्नी – तुम्हे उसके बारे में नहीं पता ,तुम उसके पास जाओ और मुझे समरागी बनाओ |

:- मछुवारा घबराते हुए सागर कि ओर गया ,उसने देखा कि सागर का पानी भूरा है ,इसका मतलब क्या हो सकता है |

मछुवारा- जादू कि मछली क्या तुम मुझे सुन सकती हो होहोहोहोहोह ……….| मेरी पत्नी खुश नहीं है |

मचली – आब उसे क्या चाहिए |

मछुवारा- वो समरागी बनना चाहती है |

मछली – वापस जाओ ,वो पहले ही बन चुकी है |

:- वो वापस आया और देखा कि वहा सोने के दरवाजे थे ,पीतल के नहीं ,घर और भी बड़ा हो गया था ,अंदर उसकी पत्नी सोने के सिंघासन पर बैठी थी ,सभी रजा और णमंत्री उसके निचे थे , उसके एक हाथ में सोने का गोला था और दुसरे हाथ में राजदंड |

मछुवारा- प्रिये , तुम सच में एक समरागी हो |

पत्नी –हा , मै हु मैंने बताया ना वो मछली सब कुछ कर सकती है |

मछुवारा- हा , तुमने कहा था , क्या आब तुम खुस हो |

पत्नी – हा सोचेंगे ,आज मेरा दिन बहुत व्यस्त रहा ,मै थक चुकी ही ,मुझे सोने जाना है |

:- मछुवाराडर रहा था कि वो कोई और मांग रखेगी , पर वो पुरे दिन के दौड़ भाग में थक गया था , जैसे ही वो लेटा गहरी नींद में सो गया ,पर पत्नी सो ना सकी ,वो बैठ कर सोचती रही कि और क्या चाहिए ,एक सप्ताह गुजर गया ,हर रात मछुवारा प्राथना करता उसे खुश करने कि ,और पत्नी है रात बिस्तर पर बैठी रहती चाँद और तारो को निहारती हुई , अंत में एक रात सोचती सोचती थक गई ,और वो आराम करना चाहती थी |

पत्नी – क्या , सुबह हो गई , सूरज कि उगने कि हिम्मत कैसे हुई ,उसे पता होना चाहिए कि मै एक सप्ताह से सोई नहीं , पतिदेव उठ जाओ , मै सूरज और चाँद को नियंत्रित करना चाहती हु ,मै नहीं चाहती कि वो मेरी आज्ञा के बिना हिले भी मै सर्व शक्तिमान बनना चाहती हु |

मछुवारा- क्या , ये बंद करो मै वापस जाकर जीवन जोखिम में नहीं डालना चाहता |

पत्नी – तुम मछली के पास जाओ ,मुझे सर्व शक्तिमान बनना है |

मछुवारा- नहीं ,प्रिये तुम्हे पता नाकि तुम क्या मांग रही हो |

पत्नी – नहीं मै ,और नहीं सह सकती , अगर तुम अभी नहीं गए तो मै परेसान हो जाउंगी , बहुत ज्यादा परेसान |

:- मछुवारा दौड़ता दौड़ता सागर के किनारे गया , सागर में जोर का तूफान मचा था ,वो ये देख कर के घबरा गया ,वो सोच रहा था कि आज चमकीली मछली बहार निकलेगा कि नहीं , और चिल्लाने लगा ,क्या तुम मुझे सुन सकती हो , ओं मछली मेरी पत्नी अभी भी खुश नहीं है |

मचली – आब वो क्या चाहती है |

मछुवारा- वो सर्व शक्तिमान बनना चाहती है ,आज्ञात |

मचली – वापस जाओ , वो पहले ही बन चुकी है |

:- मछुवारा बड़ी तेजी से भागा ,पता नहीं मेरी पत्नी को क्या बना दिया गया है ,मुझे वहा जाना चाहिए ,वो वहा देखा कि उसकी पत्नी कही नहीं थी ,वह सभी जगह खोज कर के थक गया ,और वापस सागर कि ओर चला गया | वहा देखा कि सागर एकदम सांत था आशमान भी पूरा साफ था |

मछुवारा- जादू कि मछली ,ओं जादू कि मछली क्या तुम मुझे सुन सकती हो | तुमने मेरी पत्नी के साथ क्या किया |

मछली – मैंने उसे वरदान दिया ,वो सर्व शक्तिमान और आज्ञात बनना चाहती थी ,क्यों मैंने सही कहा ना ,आज्ञात को किसी ने नहीं देखा और वो वाही है |

मछुवारा- नहीं ,नहीं मुझे मेरी पत्नी को वापस लौटा दो |

मछली – नहीं मै ,मै वरदान पलट नहीं सकता |

मछुवारा- ठीक है , तुमने मेरी पत्नी के सरे वरदान पुरे किये है ,पर मैंने तुम्हारी जान बचाई है तुम मेरा एक वरदान पूरा करो |

मछली – ठीक है बोलो तुम्हे क्या चाहिए |

मछुवारा- मै चाहता हु कि मेरी पत्नी हमेशा खुश रहे |

मछली – ठीक है ,तुम वापस जाओ ,उसे खुश रहने के लिए जो चाहिए ,वो सभी चीज उसके पास है |

:- मछुवारा दौड़ते हुए वापस गया ,उसने देखा कि उसकी पत्नी एक छोटी सी कुटिया के पास कड़ी थी और वो बदबूदार भी नहीं था वो जाकर के उसे गले से लगा लिया |

पत्नी –प्रिये ,मै आब समझ गई हु कि महल और सिंघासन ख़ुशी नहीं दे सहती ,चलो अब घर चलो |

:- उस दिन के बाद वो राजी खुशु रहने लगे ,वो समझ गई थी कि खुश रहने के लिए महल आटारी नहीं बल्कि आपस में प्रेम होना जरुरी है |

BBC

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